ध्वनि प्रदूषण क्या है इसके प्रकार, कारण, प्रभाव, व रोकने के उपाय

ध्वनि प्रदूषण क्या है
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प्रदूषण एक ऐसा नाम है जिसे सुनकर हर किसी के मन में एक अलग रूपरेखा बन जाती है। आज हम आपको ध्वनि प्रदूषण क्या है बताएंगे। कोई भी प्रदूषण हुआ, मानव जीवन के लिए हमेशा ही हानिकारक रहता है। ऐसा ही प्रदूषण का एक प्रकार है ध्वनि प्रदूषण। कोई भी न पसंद तीव्र ध्वनि, इस प्रदूषण के अंतर्गत आती है। इसको उत्पन्न करने वाले प्राकृतिक कारक भी होते हैं और मानव द्वारा उत्पन्न कारक भी होते हैं। शोर मानव जीवन के लिए भयानक खतरा बनता जा रहा है।

आज आप जानेंगे की ध्वनि प्रदूषण के कारण क्या हैं, ध्वनि प्रदूषण क्या है, ध्वनि प्रदूषण के प्रकार, ध्वनि प्रदूषण को रोकने के उपाय, ध्वनि प्रदूषण पर निबंध किस प्रकार लिखते हैं, Noise Pollution in Hindi आदि। आप हमारे इस आर्टिकल को किसी परीक्षा में पूछे जाने पर निबंध के तौर पर भी लिख सकते हैं। हमने अपने एक लेख में इससे संबंधित सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख किया है अतः आपके लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगा।

ध्वनि प्रदूषण क्या है? Noise Pollution in Hindi

इसको पर्यावरणीय शोर भी कहा जाता है जब शोर की तीव्रता पर्यावरण में अत्यधिक हो जाती है तब उसे ध्वनि प्रदूषण कहते हैं। यदि हम आपको यह सरल भाषा में समझाएं तो तात्पर्य यह निकलता है कि वह अनुपयोगी ध्वनि जो मानव तथा अन्य जीव-जंतुओं के लिए हानिकारक सिद्ध हो ध्वनि प्रदूषण कहलाता है।

ध्वनि अर्थात Noise शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के Nausea शब्द से हुई है। जिसका अर्थ होता है उल्टी जैसा महसूस होना। ध्वनि प्रदूषण को मापने के लिए जिस मापक का इस्तेमाल करते हैं उसे डेसीबल (dB) कहा जाता है। 80 dB या इससे अधिक तीव्रता का साउंड सुनने से आपके मस्तिष्क और श्रवण तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। उम्मीद करते हैं आपको ध्वनि प्रदूषण क्या है की परिभाषा समझ आ गई होगी।

वायु प्रदूषण क्या है?

ध्वनि प्रदूषण के कारण और प्रकार बताइए

इसके उत्पन्न होने के विभिन्न कारण हो सकते हैं। हम अपने इस लेख ध्वनि प्रदूषण क्या है में आपको कुछ बहुत प्रमुख कारणों का वर्णन करेंगे जो प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। ध्वनि प्रदूषण को उत्पन्न करने वाले कारक ही ध्वनि प्रदूषण के प्रकार हैं। इसको उत्पन्न करने वाले कुछ प्रमुख कारक निम्न प्रकार है-

ध्वनि प्रदूषण के कारण

उद्योगों से होने वाला ध्वनि प्रदूषण

कारखानों में विभिन्न प्रकार की बड़ी-बड़ी मशीनें लगाई जाती है। जो बहुत हद तक वायु प्रदूषण में योगदान देती है। जब यह मशीनें चलाई जाती हैं तब अत्यधिक मात्रा में ध्वनि उत्पन्न होती है। इसके अलावा हवाईजहाज भी उड़ते समय बहुत अधिक ध्वनि उत्पन्न करता है।

प्राक्रतिक श्रोत से ध्वनि प्रदूषण

नेचुरल अर्थात प्राकृतिक स्रोत से हमारा यह तात्पर्य है कि कभी कभी बदल फटने की घटनाएं हमे सुनने में आती रहती हैं। जब बदल फटता है तब बहुत भीषण आवाज उत्पन्न होती है, जिसके शोर से घरों में कांच की खिड़कियां तक टूट जाती है। इसके अलावा बिजली कड़कना, बिजली गिरना आदि जैसी कई प्राकृतिक घटनाएं इसका कारण बनती है। जो मानव जीवन को बुरी तरह प्रभावित करती हैं।

वाहनों से उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण

जैसे-जैसे जनसंख्या में वृद्धि है वैसे वैसे वाहनों की संख्या में भी प्रगति देखने को मिल रही है। ऐसे में भीड़ भाड़ बहुत ज्यादा हो जाती है और वाहनों से उत्पन्न हॉर्न की आवाज से बहुत ज्यादा ध्वनि निकलती है। इससे उत्पन्न ध्वनि लोगो को irritate करने लगती है और इसको बढ़ावा देती है।

पार्टियों से उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण

हमारे आस पड़ोस में आए दिन प्रतिदिन विभिन्न प्रकार की शादी पार्टियां होती रहती हैं। इन पार्टियों में डीजे साउंड सिस्टम भी बजाया जाता है। पार्टियों में डीजे पर बजने वाले म्यूजिक की ध्वनि तीव्रता बहुत अधिक होती है, जो आसपास के लोगो को मानसिक रूप से प्रभावित करती है। अतः इस प्रकार की अनाच्छिक ध्वनि भी एक प्रकार का ध्वनि प्रदूषण है।

ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव

इसकी परिभाषा और और इसे उत्पन्न करने वाले कारकों के बारे में अध्ययन करने के बाद अब आप हमारे इस लेख ध्वनि प्रदूषण क्या है में इससे उत्पन्न प्रभावों के बारे में पड़ेंगे। यहां आप जानेंगे की यह किस प्रकार से हमारे जीवन को प्रभावित कर रहा है।

  • बहुत अधिक समय तक तीव्र ध्वनि वाले स्थानों पर रहने से मनुष्य के श्रवण तंत्र पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है तथा उसकी सुनने की क्षमता भी कम हो जाती है।
  • इसके कारण मानव हमेशा टेंशन में रहता है वह चिड़चिड़ा हो जाता है और उसका किसी काम में मन नहीं लगता है। इससे मनुष्य साइकोलॉजिकली बीमार हो जाता है।
  • विज्ञान के अनुसार यदि कोई गर्भवती स्त्री अधिक शोर-शराबे वाली जगह के लगातार संपर्क में रहे तो उसके गर्भ में पल रहे बच्चे में बहरापन उत्पन्न हो जाता है।
  • अचानक से भयानक और तीव्र ध्वनि सुनने से मनुष्य के मस्तिष्क में कई प्रकार की विकृतियां हो जाती है जिससे उसे कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  • शोर की अधिक तीव्रता हृदय की धड़कन को भी प्रभावित करती है एवं उस में अनियमितता अर्थात तेज या धीमे ह्रदय स्पंदन जैसी समस्याएं उत्पन्न कर देती है।

ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव

ध्वनि प्रदूषण रोकने के उपाय क्या है?

इस प्रदूषण को रोकना अति आवश्यक है वरना भविष्य में चलकर मनुष्य अपनी सुनने की क्षमता में कमी देखेगा और इसका परिणाम बहुत भयानक हो सकता है। अतः आप हमारे आर्टिकल ध्वनि प्रदूषण क्या है में दिए गए कुछ उपायों को ध्यान पूर्वक जरूर पढ़ें और अपने जीवन में अपनाने का प्रयास जरूर करें। इसको रोकने के उपाय निम्नलिखित हैं –

  • अधिक भीड़भाड़ और शोर-शराबे वाली जगहों पर जाने से बचें या फिर बहुत कम समय तक ही इन जगहों पर रूके ताकि उत्पन्न शोर-शराबे से आपका मानसिक संतुलन ना बिगड़े, और आप अपना कार्य कुशलता पूर्वक कर पाए।
  • कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों को ध्वनि इससे अपने कानो की सुरक्षा के लिए कानो में विशेष प्रकार के Ear Plug का इस्तेमाल करना चाहिए जिससे मशीनों की तीव्र ध्वनि से कानो को क्षति न पहुंचे।
  • अत्यधिक शोर उत्पन्न करने वाली मशीन में साइलेंसर के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहिए।
  • धार्मिक कार्यों, शादी बरातों, पार्टियों आदि में एक उचित ध्वनि तीव्रता तक ही साउंड को बजाया जाय।
  • जगह जगह पर सड़क किनारे डेसीबल मीटर लगाया जाए जिससे की ध्वनि प्रदूषण की तीव्रता को चेक किया जा सके।
  • घरों के आसपास और सड़क के किनारे वृक्ष लगाए जाएं। क्युकी ये इसको रोकने में काफी मददगार साबित होते हैं। इन वृक्षों को हम ग्रीन मफलर के नाम से भी जानते हैं।
  • सरकार द्वारा ध्वनि कंट्रोल कानून के तहत लोगो को इसमें भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

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निष्कर्ष

ध्वनि प्रदूषण दिन व दिन बड़ता ही जा रहा है इसके कंट्रोल के लिए हमें खुद ही कुछ ठोस कदम उठाने होंगे। आशा करता हूँ कि ये लेख आपको यह लेख पसंद आया होगा। इस लेख से जुड़े किसी भी प्रश्न को कॉमेंट बॉक्स मे पूछें।

 

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